आरा/भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। घटना के बाद जहां पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब मृतक की मां आशा देवी ने भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि घटना के करीब आठ दिन बाद एसपी उनके घर पहुंचे और परिवार पर मामले को दबाने तथा मीडिया से बात नहीं करने का दबाव बनाया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पूरे मामले की जांच जारी है।

यह मामला 17 जून 2026 का है, जब भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगने से घायल हो गए। भोजपुर पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त कार्रवाई में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी के पास अवैध हथियार था और उसने पुलिस टीम पर गोली चलाई थी। पुलिस के अनुसार, आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें वह घायल हुआ। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
हालांकि मृतक के परिवार और गांव के लोगों का दावा इससे अलग है। उनका कहना है कि भरत ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। हालांकि इन वीडियो और दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने तक नहीं हुई है।
)
घटना के बाद अब मृतक की मां आशा देवी ने नया आरोप लगाते हुए कहा कि भोजपुर के एसपी उनके घर पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि परिवार को मीडिया से बात नहीं करने की सलाह दी गई और यदि उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान देना जारी रखा तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
आशा देवी ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार पर मामले को शांत करने का दबाव बनाया गया। हालांकि यह सभी दावे फिलहाल मृतक की मां के आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से भी इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मृतक की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में तत्कालीन एसडीपीओ, तत्कालीन थाना प्रभारी और अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस प्रशासन ने पुष्टि की है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर कुछ पुलिस अधिकारियों को निलंबित भी किया है। इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम की विभागीय समीक्षा शुरू की गई है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच बिहार सरकार ने इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
सरकार ने एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया है। आयोग घटनास्थल का निरीक्षण कर रहा है और मृतक के परिवार, पुलिस अधिकारियों, प्रत्यक्षदर्शियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भरत भूषण तिवारी की मौत का मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं कई सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई है। दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक तरफ पुलिस इसे आत्मरक्षा में हुई जवाबी कार्रवाई बता रही है, जबकि दूसरी ओर परिवार इसे फर्जी मुठभेड़ करार दे रहा है।
ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई न्यायिक जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल प्रशासनिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर जांच जारी है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि घटना में किस पक्ष का दावा तथ्यों पर आधारित है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।