बिहार सरकार और ईशा फाउंडेशन की पहल से राज्य के श्मशान घाटों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, सुविधाजनक और सम्मानजनक बनाना है। इसकी शुरुआत राजधानी पटना के बांसघाट श्मशान घाट से की गई है।
बांसघाट में एक ही स्थान पर मिलेंगी सभी सुविधाएं
पटना का बांसघाट श्मशान घाट करीब 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे एशिया के सबसे बड़े श्मशान घाटों में गिना जाता है। यहां अंतिम संस्कार से जुड़ी सभी आवश्यक सेवाओं को व्यवस्थित किया गया है।मृतक के परिजनों को अब पंडित, नाई, डोम राजा और अन्य धार्मिक प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग भटकना नहीं पड़ेगा। सभी सेवाएं एक निर्धारित शुल्क पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही प्रशिक्षित स्वयंसेवक भी मौजूद रहेंगे, जो शोकाकुल परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करेंगे।
काल भैरव मंडपम और विशाल प्रतिमा होगी स्थापित
बांसघाट में जल्द ही 8 फीट ऊंची काल भैरव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके साथ एक विशेष 'काल भैरव मंडपम' का निर्माण भी होगा, जहां अंतिम संस्कार से पहले धार्मिक अनुष्ठान और अन्य क्रियाएं संपन्न की जाएंगी। यहां एक समय में 18 पार्थिव शरीरों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था उपलब्ध होगी।
एसी हॉल, गंगाजल तालाब और आधुनिक सुविधाएं
श्मशान घाट में परिजनों के बैठने के लिए दो वातानुकूलित (एसी) हॉल बनाए गए हैं। स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। गंगा नदी के वर्तमान प्रवाह को देखते हुए यहां गंगाजल से भरे दो विशेष तालाब बनाए गए हैं। इनमें एक स्नान के लिए और दूसरा अस्थि विसर्जन के लिए उपयोग किया जाएगा।
15 दिनों में शुरू होगा गैस आधारित शवदाह गृह
वर्तमान में बांसघाट में लकड़ी आधारित छह चिताएं, चार विद्युत शवदाह गृह और आठ खुले प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। अगले 15 दिनों के भीतर यहां गैस आधारित आधुनिक फर्नेस भी शुरू होने जा रहे हैं। यह व्यवस्था कम खर्चीली होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी अधिक अनुकूल मानी जा रही है।
दीघा घाट समेत छह शहरों में होगा विस्तार
पटना के दीघा घाट स्थित श्मशान घाट को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। यहां एलपीजी आधारित शवदाह गृह स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा बेगूसराय के सिमरिया घाट, भागलपुर, गया, सहरसा और छपरा के श्मशान घाटों को भी आधुनिक स्वरूप देने की योजना पर काम चल रहा है।
ईशा फाउंडेशन का 15 वर्षों का अनुभव
ईशा फाउंडेशन पिछले 15 वर्षों से श्मशान घाटों के संचालन और प्रबंधन का कार्य कर रहा है। तमिलनाडु में संस्था 33 से अधिक आधुनिक शवदाह गृहों का संचालन करती है। संस्था के अनुसार अब तक 1.25 लाख से अधिक अंतिम संस्कार इन सुविधाओं के माध्यम से संपन्न कराए जा चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को यह सेवा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। भविष्य में बिहार में भी गरीब परिवारों के लिए ऐसी व्यवस्था लागू करने की योजना है।
पहली बार बिहार आ रहे हैं सद्गुरु
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु पहली बार बिहार दौरे पर आ रहे हैं। उनका तीन दिवसीय कार्यक्रम 26 जून से 28 जून तक प्रस्तावित है। इस दौरान वे राज्य के वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। 27 जून को पटना के बापू सभागार में उनका विशेष सत्संग और संवाद कार्यक्रम भी आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि बिहार में श्मशान घाटों का आधुनिकीकरण केवल सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास नहीं है, बल्कि अंतिम संस्कार की सनातन परंपराओं को सम्मानजनक और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।