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विभागीय कार्रवाई में नियमों की जानकारी जरूरी, अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण

प्रकाशित: 18-06-2026, 12:32 PM
विभागीय कार्रवाई में नियमों की जानकारी जरूरी, अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
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बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय द्वारा गुरुवार को एक उन्मुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में राज्य के सभी जिलों के कृषि पदाधिकारियों को विभागीय कार्रवाई और सीसीए नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

'अनुशासनिक कार्रवाई अर्धन्यायिक प्रक्रिया है'

दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी सेवकों के खिलाफ की जाने वाली अनुशासनिक कार्रवाई अर्धन्यायिक (Quasi-Judicial) प्रकृति की होती है। विभागीय जांच के दौरान लगभग 90 प्रतिशत प्रक्रियाएं वही अपनाई जाती हैं, जो न्यायालयों में सुनवाई के समय लागू होती हैं।

सीसीए नियमों की जानकारी होना आवश्यक

उन्होंने कहा कि बिहार सरकारी सेवा में कार्यरत सभी स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील (CCA) नियमावली 2005 की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इससे विभागीय कार्रवाई के संचालन में होने वाली त्रुटियों से बचा जा सकता है।

प्रक्रियात्मक गलतियों से खारिज हो जाते हैं कई मामले

दीपक कुमार सिंह ने बताया कि अधिकांश अनुशासनिक मामलों में न्यायालय द्वारा कार्रवाई प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण निरस्त कर दी जाती है। कई मामलों में आरोप साबित होने के बाद दिया गया दंड आरोप की गंभीरता के अनुपात में नहीं होता, जिसके चलते भी कार्रवाई अदालत में टिक नहीं पाती।

मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय की भूमिका

उन्होंने कहा कि निदेशालय का मुख्य कार्य अनुशासनिक मामलों की निगरानी और पर्यवेक्षण करना है। साथ ही जरूरत पड़ने पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को सीसीए नियमों के प्रभावी अनुप्रयोग संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाता है।

अनुशासनिक कार्यवाही और कार्रवाई में अंतर समझाया गया

प्रशिक्षक सतीश तिवारी ने अधिकारियों को अनुशासनिक कार्यवाही और अनुशासनिक कार्रवाई के बीच का अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि सीसीए नियम 17 के तहत जांच अधिकारी द्वारा आरोपों की जांच की प्रक्रिया को अनुशासनिक कार्यवाही कहा जाता है, जबकि जांच पूरी होने के बाद दिए जाने वाले अंतिम दंड को अनुशासनिक कार्रवाई माना जाता है।

तकनीकी त्रुटियों से बचने की सलाह

सतीश तिवारी ने कहा कि विभागीय जांच और कार्रवाई के दौरान तकनीकी शब्दों एवं प्रक्रियाओं का प्रयोग सीसीए नियमावली के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को तकनीकी त्रुटियों से बचने और नियमों का सही अनुपालन सुनिश्चित करने की सलाह दी।

कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में शालिग्राम पांडे और भगवान साहू ने भी अपने विचार रखे। वहीं संयुक्त सचिव प्रभात कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विभाग के पदाधिकारी प्रशिक्षण सत्र में उपस्थित रहे।

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