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मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा: एक ही रनवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान, ATC की सतर्कता से बचीं सैकड़ों जानें

प्रकाशित: 08-07-2026 08:22 AM
मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा: एक ही रनवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान, ATC की सतर्कता से बचीं सैकड़ों जानें
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मुंबई: देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार रात एक बड़ा विमान हादसा टल गया। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के दो विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने आ गए, जिससे कुछ क्षणों के लिए गंभीर दुर्घटना की आशंका पैदा हो गई। हालांकि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की त्वरित सतर्कता और पायलट की सूझबूझ के चलते समय रहते टेक-ऑफ रोक दिया गया और सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई।

घटना के बाद विमानन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार मामले की जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर दोनों विमान एक ही रनवे पर कैसे पहुंच गए।

रात 10 बजे के आसपास हुई घटना

Air India emergency landing: Delhi-Mumbai flight returns due to engine  glitch, govt orders probe - CNBC TV18

जानकारी के अनुसार यह घटना 7 जुलाई की रात करीब 10 बजे हुई। दिल्ली जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI816 टेक-ऑफ के लिए रनवे पर दौड़ना शुरू कर चुकी थी। उसी समय सिलिगुड़ी से मुंबई पहुंची एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट AIX1547 लैंडिंग के बाद अभी तक रनवे पूरी तरह खाली नहीं कर पाई थी।

इसी दौरान दोनों विमान एक ही रनवे पर मौजूद थे, जिससे संभावित टक्कर की आशंका पैदा हो गई। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

ATC ने तुरंत रोका टेक-ऑफ

जैसे ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ, उन्होंने तुरंत एयर इंडिया के पायलट को टेक-ऑफ रोकने का निर्देश दिया। पायलट ने बिना किसी देरी के Rejected Take-Off (RTO) प्रक्रिया अपनाई और विमान को सुरक्षित रूप से रनवे पर रोक दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार RTO ऐसी आपातकालीन प्रक्रिया होती है, जिसमें टेक-ऑफ शुरू होने के बाद भी सुरक्षा कारणों से विमान को तत्काल रोक दिया जाता है। यह प्रक्रिया केवल तब अपनाई जाती है जब आगे उड़ान जारी रखना जोखिम भरा हो।

तकनीकी जांच के बाद वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था

टेक-ऑफ रद्द होने के बाद एयर इंडिया का विमान वापस पार्किंग बे (Bay) में ले जाया गया, जहां इंजीनियरों ने विमान की विस्तृत तकनीकी जांच की। सुरक्षा मानकों के अनुसार सभी आवश्यक निरीक्षण पूरे होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की गई।

इस दौरान यात्रियों की असुविधा को ध्यान में रखते हुए एयर इंडिया ने उनके लिए वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था की, ताकि वे सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।

एयर इंडिया ने क्या कहा?

घटना के बाद एयर इंडिया ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि फ्लाइट AI816 के चालक दल ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया और समय रहते टेक-ऑफ रोक दिया।

एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विमान को दोबारा उड़ान भरने की अनुमति देने से पहले सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण किए गए। हालांकि कंपनी ने घटना के वास्तविक कारणों पर फिलहाल कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।

कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोनों विमान एक ही रनवे पर कैसे पहुंच गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग के बाद रनवे से पूरी तरह बाहर नहीं निकला था, जबकि उसी रनवे से एयर इंडिया की उड़ान को टेक-ऑफ की अनुमति मिल गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला रनवे प्रबंधन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और ग्राउंड मूवमेंट के बीच समन्वय से जुड़ा हो सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

जांच एजेंसियां करेंगी पूरे घटनाक्रम की समीक्षा

घटना के बाद विमानन सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। जांच में यह देखा जाएगा कि कहीं संचार व्यवस्था, रनवे क्लियरेंस, एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देश या अन्य किसी स्तर पर प्रक्रियागत या मानवीय त्रुटि तो नहीं हुई।

यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

सभी यात्री सुरक्षित, टला बड़ा हादसा

राहत की बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी यात्री, चालक दल के सदस्य या विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। दोनों विमानों में सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित रहे।

हालांकि घटना के कारण कुछ समय के लिए एयरपोर्ट का संचालन प्रभावित हुआ और संबंधित उड़ानों में देरी भी हुई। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ATC कुछ सेकंड भी देर कर देता, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे।

विमानन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश में विमानन सुरक्षा को लेकर पहले से ही सतर्कता बढ़ाई गई है। भारत के बड़े हवाई अड्डों पर प्रतिदिन हजारों उड़ानों का संचालन होता है, ऐसे में एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पायलट और ग्राउंड स्टाफ के बीच सटीक समन्वय बेहद आवश्यक होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक विमानन प्रणाली में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना बेहद जरूरी है।

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