आईएमडी ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करने की अपील की है।
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मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून गुजरात के अधिकांश हिस्सों और राजस्थान के कई इलाकों में तेजी से सक्रिय हो गया है। मानसून की रेखा लगातार आगे बढ़ रही है और अगले कुछ दिनों में इसके शेष क्षेत्रों को भी कवर करने की संभावना है।
गुजरात के दक्षिणी हिस्सों और सौराष्ट्र क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। वहीं राजस्थान के पूर्वी और दक्षिणी जिलों में भी अच्छी वर्षा होने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की सक्रियता के चलते इन क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

आईएमडी के अनुसार अगले 4–5 दिनों के दौरान निम्न राज्यों में व्यापक वर्षा होने की संभावना है—
इसके अलावा महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्य भारत के अन्य क्षेत्रों में भी भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है। कई जिलों में मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं।

आईएमडी ने बताया है कि सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों और कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के प्रभाव से कई स्थानों पर भारी बारिश के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
इसके अलावा कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है।

लगातार भारी वर्षा के कारण कई शहरों और कस्बों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। निचले इलाकों में पानी भरने, सड़क यातायात प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होने की आशंका है।
पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide) और चट्टानें गिरने का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों और पर्यटकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

मानसून की सक्रियता खरीफ फसलों के लिए राहत लेकर आई है। पर्याप्त वर्षा से धान, सोयाबीन, कपास, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुआई को फायदा मिलने की संभावना है।
हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेतों में जलभराव होने से फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। ग्रामीण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और कृषि कार्यों के प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे स्थानीय कृषि विभाग और मौसम विभाग द्वारा जारी सलाह के अनुसार ही खेतों में कार्य करें और भारी बारिश के दौरान सिंचाई या अन्य कृषि गतिविधियों से बचें।
आईएमडी ने राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को आवश्यक तैयारियां रखने की सलाह दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
प्रशासन को जलभराव वाले इलाकों की निगरानी, नालों की सफाई, आपदा प्रबंधन संसाधनों की उपलब्धता और बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान कुछ जरूरी सावधानियां अपनाएं—
आईएमडी के अनुसार उत्तर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम तथा कम दबाव के क्षेत्र के कारण मानसून अगले 4–5 दिनों तक सक्रिय बना रहेगा। इसके प्रभाव से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में लगातार बारिश होने की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा भी दर्ज की जा सकती है। इसलिए नागरिकों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।