रेलवे मेंस कांग्रेस के दो दिवसीय महाधिवेशन के शुभारंभ अवसर पर गोरखपुर पहुंचे आरा से सांसद सुदामा प्रसाद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं और आंदोलनकारियों के संघर्ष की जीत है।
"यह करोड़ों छात्र-युवाओं की जीत है"
सुदामा प्रसाद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के करोड़ों छात्र-युवाओं, अभिभावकों, किसानों और मजदूरों की जीत का प्रतीक है। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला लंबे समय से चल रहे जनसंघर्ष और विरोध प्रदर्शनों का परिणाम है।उन्होंने कहा, "आज धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा हुआ है। मैं समझता हूं कि यह देश के करोड़ों छात्र-युवाओं, अभिभावकों, किसानों और मजदूरों की जीत है। यह मोदी सरकार के घमंड की हार है।"
"संघर्ष करने वालों को सलाम"
सांसद ने आंदोलन में शामिल लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठियां खाईं, पेलेट गन के छर्रे झेले और कठिन परिस्थितियों का सामना किया, उनकी मेहनत रंग लाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी आंदोलनकारियों के साहस और संघर्ष को वह सलाम करते हैं।
सरकार पर लगाया हठधर्मिता का आरोप
इस्तीफे में हुई देरी पर पूछे गए सवाल के जवाब में सुदामा प्रसाद ने कहा कि सरकार अपने किसी भी मंत्री का इस्तीफा नहीं चाहती थी, लेकिन युवाओं के लगातार संघर्ष ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा, "सरकार हठी है। हमारे यहां कोई मंत्री आसानी से इस्तीफा नहीं देता। देश के युवाओं ने सरकार के हठ और घमंड को तोड़ा है।"
विपक्ष और आंदोलनकारियों को दिया श्रेय
सुदामा प्रसाद ने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि विपक्ष और आंदोलन से जुड़े सभी लोगों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अनशन और आंदोलन में शामिल विभिन्न लोगों ने इस संघर्ष को आगे बढ़ाया और आखिरकार सरकार को निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस्तीफे के बाद और तेज हो सकती है सियासत
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं। विपक्ष इसे छात्रों और जनता के संघर्ष की जीत बता रहा है, जबकि अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर आगे क्या रुख अपनाती है।