ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रतापगढ़ में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा कही गई बातों से वह पूरी तरह सहमत नहीं हैं, लेकिन वक्फ बोर्ड को लेकर दिए गए उनके बयान का वह पूर्ण समर्थन करते हैं।
"वक्फ बोर्ड में हुई जमीनों की बंदरबांट"
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने आरोप लगाया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड के कई जिम्मेदार पदाधिकारियों ने वक्फ की जमीनों की बिक्री और बंदरबांट की। उन्होंने कहा कि जो भी सदस्य या पदाधिकारी बना, उसने अपने-अपने क्षेत्रों में वक्फ की संपत्तियों का मनमाने ढंग से बंटवारा किया।
"गरीबों और यतीमों के लिए वक्फ की गई थीं जमीनें"
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के बुजुर्गों ने लाखों एकड़ जमीन इसलिए वक्फ की थी ताकि उससे होने वाली आय गरीबों, कमजोरों, लाचार लोगों और यतीमों के कल्याण पर खर्च हो सके। लेकिन उनके अनुसार, इस उद्देश्य को पूरा करने के बजाय वक्फ संपत्तियों में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ।
स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाने का था उद्देश्य
मौलाना ने कहा कि वक्फ की गई जमीनों का मूल उद्देश्य शिक्षा और समाज सेवा था। इन जमीनों पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मदरसे बनाए जाने थे, ताकि समाज के जरूरतमंद लोगों को लाभ मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ माफियाओं ने बुजुर्गों की इस सोच और उद्देश्य को नुकसान पहुंचाया।
वक्फ संपत्तियों के संरक्षण की उठाई मांग
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने कहा कि वक्फ की संपत्तियों का संरक्षण होना चाहिए और उनका उपयोग उन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए, जिनके लिए उन्हें वक्फ किया गया था। उन्होंने वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।