राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर अयोध्या का संत समाज खुलकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के समर्थन में सामने आया है। अयोध्या संत मंडल की ओर से हजारा मंदिर में आयोजित बैठक में संतों ने कहा कि चंपत राय का इस्तीफा फिलहाल स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और एसआईटी की रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की गई।
'SIT रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी सच्चाई'
बैठक में महंत राघवेश दास वेदांती ने कहा कि दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों की सच्चाई विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। उनकी मांग है कि ट्रस्ट से चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए।
कोषाध्यक्ष से आय-व्यय का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
महंत राघवेश दास वेदांती ने कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भी जिम्मेदारी है कि वे आगे आकर ट्रस्ट की आय-व्यय का पूरा डेबिट-क्रेडिट सार्वजनिक करें। उनका कहना था कि यदि श्रद्धालुओं और आम लोगों के मन में सवाल हैं तो ट्रस्ट को पारदर्शिता के साथ उनका जवाब देना चाहिए।
'वर्षों से मंदिर आंदोलन में योगदान दिया है चंपत राय ने'
महंत वेदांती ने कहा कि चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1993 से अयोध्या में हैं और तब से चंपत राय को लगातार काम करते हुए देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन्होंने स्वयं निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी की मांग की है, उन्हें जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
आरोप गंभीर, लेकिन निष्पक्ष जांच जरूरी
संत समाज ने यह भी माना कि दान राशि में चोरी और धन के कथित दुरुपयोग के आरोप गंभीर हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई और आगे का निर्णय लिया जाना चाहिए।
रामभक्तों से अफवाहों से बचने की अपील
बैठक में संत समाज ने रामभक्तों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखें। उनका कहना है कि सच्चाई सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।