बौद्ध और हिंदू तीर्थस्थल के रूप में विश्व प्रसिद्ध गयाजी की सूनी और बंजर पड़ी पहाड़ियों को अब इको-टूरिज्म सेंटर के रूप में विकसित करने की बड़ी पहल शुरू की जा रही है। बिहार पर्यटन विभाग ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिसका उद्देश्य हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को नई पहचान देना है।
एक लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य
पर्यटन विभाग के अनुसार ढुंगेश्वरी, ब्रह्मयोनि, प्रेतशिला, रामशिला, गुरूपा और बराबर जैसी प्रमुख पहाड़ियों पर सिड ब्लॉक तकनीक के माध्यम से एक लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। पौधारोपण का कार्य वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा किया जाएगा।
सिड ब्लॉक तकनीक से बढ़ेगी हरियाली
सिड ब्लॉक तकनीक बंजर भूमि को कम समय में हरा-भरा बनाने के लिए प्रभावी मानी जाती है। इससे मिट्टी के कटाव को रोकने, जैव विविधता बढ़ाने और स्थानीय जलवायु को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। विभाग का मानना है कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।
धार्मिक पर्यटन के साथ बढ़ेगा इको-टूरिज्म
गया और बोधगया पहले से ही धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं। यहां स्थित महाबोधि मंदिर विश्व धरोहर स्थल के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है। इसके अलावा ब्रह्मयोनि, प्रेतशिला, रामशिला और बराबर पहाड़ियां ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व के लिए जानी जाती हैं। इन स्थलों पर ट्रैकिंग, मेडिटेशन और प्रकृति प्रेमियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
कैमूर में भी विकसित होगा इको-टूरिज्म
पर्यटन विभाग कैमूर जिले के प्रसिद्ध माता मुंडेश्वरी धाम क्षेत्र में भी इको-टूरिज्म सुविधाओं के विकास की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा राज्य के कई अन्य प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों को भी इस योजना में शामिल करने की तैयारी है।
राज्यभर में 24 से अधिक इको-टूरिज्म स्थल विकसित किए जा रहे
बिहार सरकार इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राज्य के 24 से अधिक प्रमुख स्थलों को विकसित कर रही है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, झीलें, जलप्रपात, पहाड़ियां और प्राकृतिक पर्यटन स्थल शामिल हैं।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बना प्रमुख आकर्षण
पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। यह बाघों, हाथियों और विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। नेपाल सीमा से सटा यह क्षेत्र इको-टूरिज्म का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
कैमूर और भीमबांध में बढ़ रही पर्यटकों की रुचि
कैमूर वन्यजीव अभयारण्य अपने घने जंगलों, झरनों और ट्रेकिंग ट्रेल्स के लिए प्रसिद्ध है। वहीं भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य प्राकृतिक जलस्रोतों और समृद्ध जैव विविधता के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है।
डॉल्फिन, पक्षी और झीलों का अनोखा संसार
विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य गंगा डॉल्फिन के लिए प्रसिद्ध है, जहां पर्यटक नाव यात्रा का आनंद ले सकते हैं। वहीं कंवर झील पक्षी अभयारण्य एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में गिना जाता है और सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बन जाता है।
राजगीर, काकोलत और घोरा कटोरा भी आकर्षण का केंद्र
राजगीर की पहाड़ियां, नेचर सफारी, गर्म पानी के झरने और ग्लास ब्रिज पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। वहीं काकोलत जलप्रपात, घोरा कटोरा झील, बराबर गुफाएं और गुरूपा पहाड़ियां भी राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हैं।
पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन पर रहेगा फोकस
सरकार का मानना है कि इको-टूरिज्म के विकास से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।