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Mamata Banerjee या ईडी? IPAC छापेमारी मामले में किसका है अधिक दबदबा? क्या चुनाव से पहले बंगाल की मुख्यमंत्री की चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं? जानें।

Mamata Banerjee: चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में, बंगाल तब चर्चा में आया जब IPAC के प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर ईडी ने छापेमारी की। इस घटनाक्रम में और संजीदगी तब आई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद छापेमारी के दौरान प्रतीक जैन के निवास पर पहुंचीं। उन्होंने रेड के स्थल से कुछ फाइलें भी उठाईं और ईडी के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने का निर्णय लिया।

इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ममता बनर्जी के खिलाफ अदालत का दरवाजा भी खटखटा चुका है। IPAC छापेमारी मामले से संबंधित कई सवाल उठ रहे हैं। यह उत्सुकता है कि क्या इस छापेमारी में ममता बनर्जी का पक्ष मजबूत है या ईडी का? क्या बंगाल की मुख्यमंत्री की परेशानियाँ चुनाव के निकट बढ़ सकती हैं? ऐसे अनगिनत सवाल हैं जिनका पता लगाने की कोशिश की जाएगी।

IPAC छापेमारी प्रकरण में किसका पलड़ा भारी?

इस संबंध में विशेषज्ञों की राय में विविधता है। कानूनी मामलों की जानकारी रखने वालों का मानना है कि बंगाल की सीएम ने छापेमारी स्थल से फाइलें उठाकर अपनी परेशानियाँ बढ़ा ली हैं। ईडी ने इस मामले में उच्च न्यायालय का आश्रय लिया है और ममता बनर्जी के खिलाफ जांच में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए याचिका दायर करने की अनुमति मांगी है। ईडी के पास पीएमएलए की धारा 67 का सहारा है।

यदि ईडी यह सिद्ध कर देती है कि ममता बनर्जी फाइल लेकर छापेमारी स्थल से निकली हैं और यह जांच के लिए महत्वपूर्ण है, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है। ममता बनर्जी मुख्यमंत्री हैं, लेकिन सदन के बाहर उन्हें कोई विशेष अधिकार नहीं है। यही कारण है कि IPAC छापेमारी प्रकरण में ईडी का पक्ष ममता बनर्जी की तुलना में मजबूत प्रतीत हो रहा है।

क्या चुनाव से पहले बढ़ सकती हैं Mamata Banerjee की मुश्किलें?

इसका स्पष्ट उत्तर भविष्य में छिपा है। हालांकि, यह संभावना है कि ईडी अपनी कार्रवाई को तेजी से बढ़ाकर बंगाल की मुख्यमंत्री की परेशानियों में इजाफा कर सकती है। पूर्व में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे नेताओं के उदाहरण मौजूद हैं, जिन्हें पद पर रहते हुए गिरफ्तार किया गया। यदि ईडी साबित कर देती है कि रेड के दौरान ममता बनर्जी द्वारा उठाई गई फाइल जांच में महत्वपूर्ण है, तो यह बंगाल की सीएम की मुश्किलों को बढ़ा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस वर्ष बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यदि IPAC पर ईडी का शिकंजा इसी तरह कसता रहा, तो टीएमसी प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा प्रभाव ममता बनर्जी पर भी पड़ सकता है और उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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