Korean Skincare: कोरियन स्किनकेयर केवल कोरिया में ही नहीं, बल्कि आज पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय हो चुका है। लेकिन इसकी पॉपुलैरिटी के पीछे की असली वजह क्या है? कोरियन स्किनकेयर में ऐसी कौन सी विशेषताएँ हैं जो इसे भारतीय स्किनकेयर से अलग बनाती हैं? इस पर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. गौरांग ने चर्चा की। शुभांकर मिश्रा के साथ हुए एक इंटरव्यू में इस विषय पर एक क्लिप सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी है। आइए जानते हैं कि डर्मेटोलॉजिस्ट ने इस बारे में क्या कहा और कोरियन स्किन केयर की विशिष्टता के पीछे क्या कारण है। क्या इसका असर भारतीय स्किन पर भी देखा जा सकता है?
क्यों कोरियाई लोगों की त्वचा होती है अलग और शीशे जैसी
डॉ. गौरांग का कहना है कि कोरियन स्किनकेयर इसीलिए विशिष्ट हो गया है क्योंकि कोरिया की प्राकृतिक त्वचा भी उन्हें एक उपहार में मिली है। उदाहरण के लिए, यदि हम अंग्रेजों की त्वचा की बात करें, तो वह काफी पतली होती है और झुर्रियाँ जल्दी आ जाती हैं। हमारी त्वचा थोड़ी मोटी होती है, जिससे झुर्रियाँ 40-50 साल की उम्र में आती हैं, जबकि कोरियाई लोगों में झुर्रियाँ 60 साल के बाद आती हैं क्योंकि उनकी त्वचा और भी मोटी होती है। यही एक कारण है जो कोरियन स्किन की विशिष्टता को दर्शाता है।
क्यों है Korean Skincare सबसे खास और प्रभावी
कोरियन स्किनकेयर को अनूठा मानते हुए डॉक्टर कहते हैं कि उनके मॉइस्चराइज़र्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि उनमें बेहतरीन उत्पादों का उपयोग किया जाता है। ये एंटी-एजिंग होते हैं और त्वचा की संवेदनशीलता के लिए स्किन सेफ टोनर का उपयोग किया जाता है जिसमें एक खास तरीके से काम किया जाता है। एस्ट्रिंजेंट का प्रयोग कोरियन स्किनकेयर में किया जाता है, जो इसके फायदों को बढ़ाता है।
आप भी कर सकते हैं कोरियन स्किनकेयर अपनाना
यह सच है कि कोरियन ग्लास स्किन ना सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बेहद प्रसिद्ध है और लोग इसे अपनाते भी हैं। इस बात की पुष्टि डर्मेटोलॉजिस्ट ने भी की है। यह आपकी त्वचा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि कोरियन स्किन अलग होती है। बाजार में कोरियन स्किनकेयर के कई उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दिए गए चिकित्सीय सुझाव केवल सामान्य जानकारी प्रदान करते हैं। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव समझा जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।








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