DK शिवकुमार: ‘सीएम पद’ के लिए कर्नाटक में जारी संघर्ष के बीच बीजेपी का तीखा हमला, उपमुख्यमंत्री दल हैरान
DK Shivakumar: कर्नाटक में चल रही राजनीतिक हलचल के बीच बीजेपी ने एक बार फिर से अपनी स्थिति को मजबूत किया है। प्रमुख विपक्षी दल के रूप में, बीजेपी ने मुख्यमंत्री बदलाव को लेकर भड़के विवाद पर तीखा व्यंग्य किया है। बीजेपी कर्नाटक के आधिकारिक एक्स हैंडल पर डीके शिवकुमार के लिए सीएम चेयर को “आउट ऑफ स्टॉक” बताया है, जिससे हलचल मच गई है। इस कटाक्ष ने उपमुख्यमंत्री के समर्थकों को झकझोर कर रखा है, और वे किसी प्रकार की टिप्पणी देने से बचते नजर आ रहे हैं। वहीं, सिद्धारमैया के समर्थक भी डीके शिवकुमार की ताजपोशी के लिए सकारात्मक संकेत नहीं दे रहे हैं। इस सभी राजनीतिक घटनाओं ने कांग्रेस को एक कठिनाई में डाल दिया है, जिससे बाहर निकलना आसान नहीं होगा।
कर्नाटक में ‘सीएम चेयर’ के लिए जारी संग्राम पर बीजेपी का तीखा व्यंग्य!
बीजेपी कर्नाटक के एक्स हैंडल से जारी एक पोस्ट में डीके शिवकुमार को हैरत के मंजर में दिखा रही है। इस पोस्ट का संदर्भ सीएम चेयर से संबंधित है।
दरअसल, कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हलचल तेज है। विधायकों का एक खेमे ने डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहा है। लेकिन, सीएम सिद्धारमैया अभी अपने पद से हटने के लिए तैयार नहीं हैं। इस परिस्थिति को देखते हुए बीजेपी ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए इस विवाद को भुनाने की कोशिश की है। पार्टी के एक्स हैंडल से पोस्ट में दर्शाया गया है कि डीके शिवकुमार अमेजन पर सीएम चेयर की तलाश कर रहे हैं। हालांकि, जब भी उन्हें सीएम चेयर मिलती है, वह जल्द ही “आउट ऑफ स्टॉक” हो जाती है, जिससे वह निराश हो जाते हैं। इसे एक व्यंग्य के रूप में देखा जा रहा है।
DK Shivakumar गुट के विधायक हैं हैरत में!
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन से संबंधित सियासी युद्ध की गूंज दिल्ली तक सुनाई दे रही है। इस बीच, डीके शिवकुमार के समर्थक विधायक दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से अपनी बात रखने के लिए यात्रा कर रहे हैं। डीके शिवकुमार ने भी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है। आलाकमान इस समय चुप्पी साधे हुए है और क्षति नियंत्रण में जुटा हुआ है। इन सबके बीच, बीजेपी के तीखे कटाक्ष और हमलों ने उपमुख्यमंत्री के गुट को हैरत में डाल दिया है। सभी की नजर आलाकमान के निर्णय पर है। देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस राजनीतिक चुनौती का सामना कैसे करता है।
