Blood Sugar: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसे नियंत्रित करने के लिए जीवनभर संतुलित आहार का पालन करना पड़ता है। लाइफस्टाइल में जरा सी भी गड़बड़ी होने पर मरीज कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। शुगर का स्तर बढ़ने पर किडनी, हृदय, स्ट्रोक और आंखों की समस्याएं, संक्रमण आदि जैसी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए चिकित्सकों के द्वारा संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। इस संदर्भ में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि HbA1c परीक्षण कब और कितनी बार करवाना चाहिए। आजकल कई घरों में ऑटोमैटिक ब्लड शुगर टेस्टिंग ग्लूकोमीटर उपलब्ध हैं, जो दिनभर में बढ़ते-घटते डायबिटीज का पता लगाने में सहायक होते हैं। हालांकि, डॉक्टर नियमित अंतराल पर HbA1c टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
HbA1c टेस्ट क्या है?
डायबिटीज के मरीज को HbA1c परीक्षण कराने की सलाह डॉक्टर तीन महीने में एक या दो बार देने की सिफारिश कर सकते हैं। यह टेस्ट बढ़े हुए शुगर स्तर पर निर्भर करता है। इस परीक्षण से यह पता चलता है कि ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित है या नहीं। यह रक्त में हीमोग्लोबिन से जुड़े ग्लूकोज की मात्रा को मापता है। मरीज इस टेस्ट को किसी भी समय करा सकता है, इसके लिए किसी विशेष आहार की आवश्यकता नहीं होती।
HbA1c डायबिटीज के मरीज का कितना होना चाहिए?
HbA1c परीक्षण मरीज के ब्लड शुगर लेवल पर निर्भर करता है। यदि किसी मरीज का शुगर लेवल HbA1c 5.7 प्रतिशत से कम है, तो इसे अच्छा माना जाता है। वहीं, यह लेवल 5.7 से 6.4 प्रतिशत के बीच है तो मरीज को प्री-डायबिटिक माना जाता है। अगर शुगर का स्तर 6.5 प्रतिशत है, तो इसे बढ़ा हुआ माना जाता है।
कैसे पहचानें शुगर लेवल सामान्य है?
जब भी शुगर का टेस्ट किया जाता है, तो यह खाने से पहले 80-100 मिग्रा/डीएल होना चाहिए। यदि ऐसा है, तो मरीज सामान्य माना जाता है। वहीं, खाने के बाद 140 मिग्रा/डीएल सामान्य माना जाता है। यदि यह स्तर इससे ऊपर या नीचे जाता है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।



