Bengal Politics: एक दशक से अधिक समय हो गया जब टीएमसी ने बंगाल की सत्ता पर कब्जा किया था। 2011 के बाद से टीएमसी लगातार बंगाल की राजनीति में शीर्ष स्थान पर है। इस दौरान बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में ममता बनर्जी को निशाना बनाती रहती है। हाल ही में एक विश्लेषण सामने आया है जिसमें यह बताया गया है कि बंगाल के कई जिलों में मुसलमान अल्पसंख्यक से बहुसंख्यक बन रहे हैं। बीजेपी इस बदलती जनसांख्यिकी को लेकर सत्तारुढ़ टीएमसी की प्रमुख ममता बनर्जी पर हमले कर रही है। अमित मालवीय, सुकांत मजूमदार जैसे स्थानीय नेताओं ने वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन के विश्लेषण को साझा करते हुए चिंता जताई है और ममता बनर्जी को निशाना बनाया है।
क्या बंगाल के कई जिलों में मुसलमान अल्पसंख्यक से बहुसंख्यक हो रहे हैं?
वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने अपने अनुभवों के आधार पर एक विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि बंगाल में जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है। राजीव रंजन के अनुसार, “पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसके असली आंकड़े जनगणना के बाद सामने आएंगे। मुसलमान कई जिलों में अब बहुसंख्यक बन गए हैं। पहले मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तरी दिनाजपुर जिलों में मुसलमान बहुसंख्यक थे, और अब कुछ और जिले इस सूची में शामिल होंगे।” इसके अलावा, राजीव रंजन ने कोलकाता के सार्वजनिक स्थानों पर मुसलमानों की संख्या में वृद्धि का भी दावा किया है। उनके इस दावे पर बंगाल की राजनीति में हंगामा मचा हुआ है।
बदले समीकरण को लेकर बीजेपी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोला
बीजेपी इस पूरे मुद्दे को लेकर टीएमसी और ममता बनर्जी पर हमलावर है। बंगाल बीजेपी के एक्स हैंडल से एक पोस्ट जारी कर दावा किया गया है कि ममता बनर्जी के शासन के दौरान बंगाल में कई जिले मुस्लिम बहुल हो गए हैं। 1951 में बंगाल में 78.45% हिन्दू और 19.85% मुसलमान थे, लेकिन 2025 में मुसलमानों की जनसंख्या 33% होने का दावा किया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि हिंदू जनसंख्या घटकर 65% तक पहुंच गई है। बीजेपी का कहना है कि बंगाल में जनसांख्यिकी परिवर्तन अब कोई चुप्पे वाली घटना नहीं रह गई है। इस मुद्दे को लेकर बीजेपी ने टीएमसी और ममता बनर्जी पर हमले तेज कर दिए हैं।



