Asha Dashami Vrat 2026: आशा दशमी का महत्व और कथा
प्रकाशित: 23-07-2026 06:06 AM
Asha Dashami Vrat 2026: आशा दशमी का महत्व और कथा Written By: Updated: Thu, 23 Jul 2026 (10:23 IST) Asha Dashami significance: हिंदू धर्म में आशा दशमी एक महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और व्यक्ति की अधूरी इच्छाएं पूरी होने का मार्ग प्रशस्त होता है। यह व्रत विशेष रूप से आशाओं, इच्छाओं और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।ALSO READ: आशा दशमी व्रत क्यों रखा जाता है? जानें इसका धार्मिक महत्व, कथा और तिथि के बारे में... आशा दशमी व्रत शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को दशमी तिथि प्रारम्भ- 23 जुलाई 2026 को 07:03 ए एम बजे दशमी तिथि समाप्त- 24 जुलाई 2026 को 09:12 ए एम बजे आशा दशमी व्रत का धार्मिक महत्व हिंदू पंचांग के अनुसार आशा दशमी का व्रत शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त देवी-देवताओं का पूजन कर अपने जीवन में सुख, शांति, धन-धान्य और सफलता की कामना करते हैं। इस व्रत के महत्व के अनुसार 'आशा' का अर्थ है उम्मीद या विश्वास, इसलिए यह व्रत जीवन में नई उम्मीद और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत करने से मन की इच्छाएं पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है। घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है तथा जीवन की परेशानियां कम होती हैं। परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। आशा दशमी केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि जीवन में उम्मीद और विश्वास बनाए रखने का पर्व भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ आशा दशमी का व्रत करता है, उसके जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और उसे शुभ फल प्राप्त होते हैं। यह व्रत व्यक्ति को धैर्य, विश्वास और सकारात्मक सोच रखने की प्रेरणा देता है। आशा दशमी व्रत की कथा-कहानी जब महाभारत काल में अर्जुन ने जीवन की निराशाओं से पार पाने का उपाय पूछा, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें 'आशा दशमी व्रत' का महत्व और इसकी पौराणिक कथा सुनाई थी। यह वही पावन कथा है जिसने बिछड़े हुए दो प्रेमियों को फिर से मिला दिया था। द्यूत क्रीड़ा और नल-दमयंती का बिछोह प्राचीन काल में निषध देश के पराक्रमी राजा नल अपने भाई पुष्कर के साथ जुए/ द्यूत के खेल में अपना सब कुछ हार बैठे। राज-पाठ छीन जाने के बाद राजा नल अपनी पतिव्रता पत्नी दमयंती के साथ राज्य छोड़कर घने जंगलों में चले गए। दोनों का जीवन बेहद कठिन हो गया था- न रहने को ठिकाना, न खाने को अन्न। वे केवल पानी पीकर एक जंगल से दूसरे जंगल भटक रहे थे। एक और विपत्ति और अनचाही जुदाई एक दिन राजा नल ने सोने जैसी चमक वाले कुछ पक्षी देखे। भूख और मजबूरी में उन्होंने उन्हें पकड़ने के लिए अपना एकमात्र वस्त्र उन पर फेंक दिया, लेकिन पक्षी वह वस्त्र लेकर उड़ गए। अपनी इस दुर्दशा से राजा नल इतने लज्जित और दुखी हुए कि जब दमयंती गहरी नींद में सो रही थीं, तो वे उन्हें उसी हाल में अकेला छोड़कर चले गए। रानी दमयंती का संघर्ष जब दमयंती की आंख खुली और राजा नल को गायब पाया, तो जंगल में उनका चीत्कार गूंज उठा। अपने प्राणप्रिय पति को ढूंढते-ढूंढते कई दिन बीत गए। रोती-बिलखती दमयंती अंततः 'चेदि' देश पहुंचीं। उनकी हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि वे एक विक्षिप्त स्त्री जैसी लगने लगी थीं और बच्चे उन्हें घेरकर तंग करते थे। राजमाता का आश्रय और आत्मसम्मान एक दिन चेदि देश की राजमाता की नजर भूमि पर पड़ी दमयंती पर गई। धूल-धूसरित होने के बाद भी उनके चेहरे पर दिव्य चंद्र-सी कांति थी। राजमाता ने उन्हें महल में बुलाकर उनका परिचय पूछा। दमयंती अपनी व्यथा पर लज्जित थी, लेकिन स्वाभिमानी भी थी तो उन्होंने स्पष्ट कहा: 'मैं एक कुलीन शादीशुदा स्त्री हूं। मैं किसी के पैर नहीं धोऊंगी और न किसी का झूठा खाऊंगी। यदि कोई मेरे स्वाभिमान पर आंच लाएगा, तो उसे दंड देना होगा। इसी शर्त पर मैं यहां रह सकती हूं।' राजमाता ने उनकी शर्त स्वीकार की। कुछ समय बाद एक ब्राह्मण की मदद से दमयंती अपने मायके पहुंच गईं, लेकिन पति के बिना उनका मन सदा उदास रहता था। आशा दशमी व्रत का चमत्कार पति को वापस पाने की तड़प में दमयंती ने एक विद्वान ब्राह्मण से मार्गदर्शन मांगा: 'हे देव! मुझे कोई ऐसा उपाय या व्रत बताएं जिससे मुझे मेरे स्वामी पुनः मिल जाएं।' ब्राह्मण ने उन्हें आशा दशमी व्रत करने की सलाह दी और कहा- 'यह व्रत मनचाही सिद्धि देने वाला है। इसके प्रभाव से तुम्हारी हर आशा पूरी होगी।' दमयंती ने पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ आशा दशमी का अनुष्ठान किया। इस चमत्कारी व्रत के प्रभाव से राजा नल और रानी दमयंती का पुनः मिलन हुआ और उनका खोया हुआ राज्य और सुख-समृद्धि भी उन्हें वापस मिल गई। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: लेखक के बारे में राजश्री कासलीवाल श्रीमती राजश्री कासलीवाल पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव। धर्म, व्रत-त्योहार, ज्योतिष, रेसिपी, साहित्य, लाइफ स्टाइल और अन्य विषयों पर लेखन का कार्य। वर्तमान में विश्व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब-एडिटर (कंटेंट) के पद पर कार्यरत हैं। ....