रेकी का महत्त्व एवं उपयोग
प्रकाशित: 29-07-2026 04:51 AM
<p>रेकी का महत्त्व एवं उपयोग रेकी कैसे सीखी जाती है? if (!isDesktop()) { window.googletag = window.googletag || { cmd: [] }; const ads = [ { adUnit: '/1031084/WD_Mobile_1X1_Test_A', divId: 'div-gpt-ad-1771932867897-0' }, { adUnit: '/1031084/Billboard_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1778486636609-0' }, { adUnit: '/1031084/Light_Box_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1778486744849-0' }, { adUnit: '/1031084/Native_Test_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1778486843934-0' }, { adUnit: '/1031084/Novoroll_InRead_1X1', divId: 'div-gpt-ad-1778486928136-0' }, { adUnit: '/1031084/Affinity_Footer_HI', divId: 'div-gpt-ad-1785151590617-0' }, { adUnit: '/1031084/Affinity_Footer_TG', divId: 'div-gpt-ad-1785151700816-0' }, { adUnit: '/1031084/Affinity_Footer_TM', divId: 'div-gpt-ad-1785151795749-0' }, { adUnit: '/1031084/Affinity_M-Canvas_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1785151861757-0' }, { adUnit: '/1031084/English_Webstory', divId: 'div-gpt-ad-1785151937431-0' }, { adUnit: '/1031084/Hindi_Webstory', divId: 'div-gpt-ad-1785151996435-0' }, { adUnit: '/1031084/Infolinks_Footer_II_1X1', divId: 'div-gpt-ad-1785152063641-0' }, { adUnit: '/1031084/Mediastreet_InRead_1X1', divId: 'div-gpt-ad-1785152138790-0' }, { adUnit: '/1031084/Mobile_Global_1_Interstitial_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1785152210452-0' }, { adUnit: '/1031084/Mobile_Global_2_Interstitial_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1785152281895-0' }, { adUnit: '/1031084/Mobile_Interstitial_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1785152356724-0' }, { adUnit: '/1031084/Mobile_Interstitial_GU_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1785152429529-0' }, { adUnit: '/1031084/Mobile_Interstitial_HI_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1785152510302-0' }, { adUnit: '/1031084/Mobile_Interstitial_KN_1x1', divId: 'div-gpt-ad-1785152595623-0' }, { adUnit: '/1031084/Mobile_Interstitial_MA_1x1', divId: 'ddiv-gpt-ad-1785152723148-0' } ]; const container = document.getElementById('mobile_1x1_ads'); googletag.cmd.push(function () { ads.forEach(function(ad) { var div = document.createElement('div'); div.id = ad.divId; container.appendChild(div); googletag.defineSlot( ad.adUnit, [1, 1], ad.divId ).addService( googletag.pubads().enableSingleRequest(); ads.forEach(function(ad) { googletag.display(ad.divId); }); }); } if (!isDesktop()) { let div = document.createElement("div"); div.id = "div-gpt-ad-1774514635711-0"; div.style.minWidth = "300px"; div.style.minHeight = "250px"; document.getElementById("art_mb_top").appendChild(div); window.googletag = window.googletag || { cmd: [] }; googletag.cmd.push(function () { ).addService( googletag.pubads().enableSingleRequest(); } NDND रेकी बहुत सौम्य ऊर्जा होने के साथ-साथ बहुत प्रभावी होती है। इसके उपयोग के लंबे इतिहास में यह हृदय रोग, कैंसर, अस्थि भंग, अनिद्रा, थकान, सिरदर्द, चर्म रोग, डिप्रेशन इत्यादि में प्रभावी सिद्ध हुई है। यदि उपचार की अन्य विधियों के साथ में इसका उपयोग किया जाता है तो यह उनके प्रभावों को बढ़ाती है व रोगी अपेक्षाकृत कम समय में ठीक हो सकता है।रेकी का मूल्य 1. इससे नुकसान कुछ नहीं होता, परन्तु यह फायदा बहुत करती है।2. यह एक क्षण में उत्पन्न होती है और इसकी स्मृति सदा के लिए बनी रहती है।3. कोई मनुष्य इनता धनी नहीं है कि जिसका इसके सिवाय निर्वाह हो सके, और न कोई इतना दरिद्र है कि जो इसके लाभों से धनी न हो सके । 4. यह विचारों में शुद्धता व विश्वास लाती है, परिवार में सुख व हौसला बढ़ाती है, व्यापार में हिम्मत व ख्याति प्रदान करती है, व्यवहार में कुशलता व समर्थन पैदा करती है।5. यह थके हुए व्यक्ति के लिए विश्राम है, हतोत्साह के लिए दिन का प्रकाश है, ठिठुरे हुए के लिए धूप है, कष्ट के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम प्रतिकार है। स्वास्थ्य के लिए कायाकल्प का वरदान है।6. जब तक यह न ली जाए तब तक संसार में यह किसी के काम की नहीं।रेकी कैसे सीखी जाती है? रेकी की सबसे बड़ी विशेषता है इसकी सरल चिकित्सा। इसलिए कोई भी व्यक्ति इसे सीख सकता है। इसमें उम्र, शिक्षा, साधना, आसन आदि का कोई बंधन नहीं है। इसे सीखने के लिए केवल इच्छा, विश्वास एवं श्रद्धा की आवश्यकता है।यह विद्या दो दिन के सेमिनार में सिखाई जाती है, जिसमें करीब बारह से पंद्रह घंटे का समय लगता है। इस सेमिनार में 'रेकी मास्टर' (प्रशिक्षक) द्वारा व्यक्ति को 'सुसंगतता' प्रदान की जाती है, जिसे 'एट्यूनमेंट' या 'इनिसियेशन' या 'शक्तिपात' भी कहा जाता है, जिससे व्यक्ति के शरीर में स्थित 'शक्ति केंद्र' जिन्हें हम 'चक्र' कहते है, खुलकर गतिमान हो जाते हैं, जिससे उनमें 'जीनव शक्ति' का संचार होने लगता है। इसके बाद यह शक्ति जीवनपर्यंत तथा हर समय व्यक्ति के पास रहती है। इससे वह स्वयं का और दूसरों का उपचार कर सकता है। इस शक्ति को और अधिक विकसित कर समय एवं दूरी से ऊपर उठकर उचार करने की शक्ति प्राप्त होती है।रेकी की सुचारुता चूँकि रेकी का प्रयोग करने वाला व्यक्ति केवल उसका वाहक होता है, उसका मूल स्रोत नहीं, अतः प्रयोग करने के कारण रेकी उपचारक की अपनी ऊर्जा कम नहीं होती, अपितु उसके माध्यम से रेकी जाने के कारण रोगी की चिकित्सा के साथ-साथ उसकी अपनी भी चिकित्सा होती है और उपचारक का ऊर्जा स्तर बढ़ता है। if (isDesktop()) { let div = document.createElement("div"); div.id = "div-gpt-ad-1656303527422-0"; div.style.minWidth = "336px"; div.style.minHeight = "280px"; document.getElementById("ros_left").appendChild(div); window.googletag = window.googletag || { cmd: [] }; googletag.cmd.push(function () { ).addService( googletag.pubads().enableSingleRequest(); } googletag.cmd.push(function() { .blogImgBlock img {max-width: 100%;} .authorimageside img { width: 70px; height: 70px; border-radius:50%;} हमारे साथ WhatsApp पर जुड़ने के लिए यहां</p>