पॉलिटिक्स

Asaduddin Owaisi: ‘संविधान किसी दिव्य शक्ति का नाम नहीं…,’ वंदे मातरम पर बहस के दौरान AIMIM प्रमुख क्यों हुए गरम? हुआ बवाल

Asaduddin Owaisi: सदन में चर्चा तेज है। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन और प्रियंका गांधी के बयानों पर बातें हो रही हैं। इस बीच एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी का एक बयान सभी की ध्यान खींच रहा है। लोकसभा में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा के दौरान ओवैसी ने स्पष्ट रूप से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संविधान “हम लोग” से शुरू होता है, किसी देवी-देवता के नाम से नहीं। ऐसे में देशभक्ति को किसी विशेष धर्म या पहचान से जोड़ना संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। लोकसभा में हलचल के बीच ओवैसी की ये टिप्पणी विशेष रूप से चर्चा में है।

वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान सदन में क्यों भड़क उठे Asaduddin Owaisi?

लोकसभा में हंगामे के बीच सभी सांसद अपने विचार रख रहे थे। जब असदुद्दीन ओवैसी की बारी आई, तो उन्होंने भड़कते हुए अपना पक्ष रखा।

ओवैसी ने सदन में कहा कि “देशभक्ति को किसी एक धर्म या पहचान से जोड़ना संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे सामाजिक विभाजन बढ़ेगा। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और इस अधिकार को किसी भी धार्मिक पहचान से नहीं जोड़ा जा सकता। संविधान “हम लोग” से शुरू होता है, न कि किसी देवी-देवता के नाम से।” यह टिप्पणी ओवैसी के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।

लोकसभा में सांसद असदुद्दीन ओवैसी का शायराना अंदाज!

अपने विचार खुलकर रखने के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में शायराना अंदाज में बोलते हुए कहा कि “मेरे मजहब की बुनियादी तालीम तौहीद है, अल्लाह के सिवा हमारा कोई खुदा नहीं है।” इसके अलावा, उन्होंने वंदे मातरम की अनिवार्यता पर भी आपत्ति जताते हुए कहा, “हम माँ की ईबादत नहीं करते, हम केवल अल्लाह की ईबादत करते हैं।” इसी तर्क को लेकर ओवैसी और अन्य नेता राष्ट्रीय गीत की अनिवार्यता का विरोध कर रहे हैं।

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