मकर संक्रांति 2026: तिल, गुड़, खिचड़ी और तेल का दान करने से हो सकते हैं बड़े लाभ! पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की जानकारी भी लें

Makar Sankranti 2026: नए वर्ष का पहला उत्सव देशभर में हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मुख्य रूप से मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन, लोग प्रात: स्नान कर सूर्य देव की पूजा अर्चना करते हैं। 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। दरअसल, 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, इसलिए चावल का सेवन या उसे छूने से मना किया गया है। यही कारण है कि द्वादशी तिथि में 15 जनवरी को मकर संक्रांति का आयोजन किया जाएगा। इस दिन, लोग तिल, गुड़, खिचड़ी, तेल, अनाज और कंबल का दान कर सकते हैं, जो उनकी स्थिति बदलने में सहायक हो सकता है। आइए हम आपको मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में बताते हैं।

तिल, गुड़, खिचड़ी और तेल का दान करने से बदल सकती है दशा!

वर्ष के पहले पर्व मकर संक्रांति पर कई वस्तुओं का दान किया जाता है। लोग प्रात: स्नान के बाद काले तिल और तेल का दान करते हैं, जिससे शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। संक्रांति के दिन खिचड़ी का दान और सेवन शुभ माना जाता है। गुड़ का दान करने से सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त करने का विश्वास है। इसके अलावा, अनाज, कंबल, गाय का घी, सप्तधान्य, वस्त्र, रेवड़ी, चावल, सब्जियां आदि का दान भी प्रमुख है, जो लोग मकर संक्रांति के दिन करते हैं। ऐसा करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनकी दशा में परिवर्तन आता है।

मकर संक्रांति 2026 पर जानें पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिष के अनुसार, मकर संक्रांति का पर्व इस बार 15 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन, सूर्य देवता दक्षिणायण से उत्तरायण की ओर बढ़ेंगे। मकर संक्रांति पर पुण्यकाल 15 जनवरी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सुबह 8 बजे तक रहेगा। लोग दोपहर 12 बजे तक भी उत्साहपूर्वक पर्व मना सकते हैं। इस दौरान सूर्य देव की पूजा की जाएगी। प्रात: स्नान करके तांबे के लोटे में लाल फूल और चंदन डालकर सूर्य को अर्घ्य दिया जा सकता है। इसके बाद लोग अपने पूर्वजों के नाम पर संकल्प लेते हैं और इच्छित वस्तुओं का दान करते हैं। तत्पश्चात, काले तिल और खिचड़ी का सेवन कर मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जा सकता है।

Disclaimer: यहां प्रस्तुत जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। डीएनपी इंडिया/लेखक इन बातों की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं प्रस्तुत करता है।

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