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मुंबई में लोकल या मौत की सवारी? 8 सालों में हज़ारों यात्रियों ने गंवाई अपनी जान

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों से जुड़ा एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. हाल ही में सेंट्रल रेलवे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया कि पिछले आठ सालों में रेलवे से जुड़े हादसों में 8273 लोगों की मौत हो चुकी हैं. सिर्फ 2025 के पहले पांच महीनों में ही 443 लोगों की जान गई है. इन लोगों की पटरी पार करते समय या फिर चलती लोकल ट्रेन से गिरने की वजह मौत हो गई.सेंट्रल रेलवे की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में एक हलफनामे जमा किया गया है. इसमें रेलवे हादसों में हुई मौतों की जानकारी दी गई है. 2018 में पटरी पार करते समय 1022 और ट्रेन से गिरने पर 482 मौतें हुईं. 2019 में 920 लोग पटरी पार करते समय और 426 लोग चलती ट्रेन से गिरकर मारे गए. 2020 में यह आंकड़ा 471 और 134 रहा, जो कोविड महामारी के कारण ट्रेनों की आवाजाही कम होने का असर माना जा सकता है.

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ट्रेन हादसे में मौत के आंकड़े
साल पटरी पार करते समय मौतें चलती ट्रेन से गिरकर मौतें
2021 748 189
2022 654 510
2023 782 431
2024 674 387

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2025 में अब तक हुई 443 लोगों की मौत
2025 में अब तक, मई महीने तक ही 293 लोग पटरी पार करते समय और 150 लोग चलती ट्रेन से गिरकर अपनी जान गंवा चुके हैं. इन बढ़ते हादसों की जानकारी देते हुए सेंट्रल रेलवे के CPRO स्वप्निल नीला ने बताया कि हादसे सिर्फ लोकल ट्रेन में चढ़ते-उतरते समय नहीं, बल्कि पटरी पार करते समय और अन्य लापरवाहियां बरतने के कारण भी होते हैं. रेलवे ने भीड़ कम करने के लिए दफ्तरों के समय बदलने का सुझाव दिया है.

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नॉन-एसी ऑटोमेटिक डोर वाली ट्रेनें
साथ ही अधिकारियों से आग्रह किया है कि छुट्टियां सप्ताह के मध्य में दी जाएं, ताकि ट्रेनों पर भीड़ का दबाव समान रूप से बंट सके. स्वप्निल नीला ने यह भी जानकारी दी कि साल के आखिर तक नॉन-एसी ऑटोमेटिक डोर वाली ट्रेनें तैयार हो जाएंगी, जिससे दरवाजों पर खड़े होकर सफर करने की प्रवृत्ति पर कुछ हद तक लगाम लगाई जा सकेगी. वर्तमान में मध्य रेलवे के पास 12 डिब्बों वाली 156 रैक, 15 डिब्बों की 2 रैक और 7 एसी लोकल ट्रेनें हैं, जो हर दिन 1700 से ज्यादा चक्कर लगाती हैं.

मुंबई की लोकल ट्रेनों में सुबह और शाम के समय इतनी भीड़ होती है कि दरवाजों पर पैर रखने तक की जगह नहीं होती. भीड़ कम होने के बावजूद कुछ यात्री तो दोपहर में भी ट्रेन के दरवाजों पर ही खड़े होकर सफर करते हैं. पूछे जाने पर कई लोगों ने कहा कि उन्हें हवा लगने के कारण दरवाजे पर सफर करना पसंद है. इस पसंद के चलते हर साल सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है.

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