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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: अच्छी खबर! एआई सेक्टर में भारत बना तीसरा सबसे प्रतिस्पर्धी देश, क्या अगले 5 वर्षों में अमेरिका को चुनौती देने में सफल होगा? रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारी!

Artificial Intelligence: भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस क्षेत्र में तेजी से प्रगति करने का प्रयास किया है। इस दौरान, भारत में कई कंपनियों ने एआई उद्योग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके साथ ही, भारत सरकार ने भी कई नवाचारों और एआई स्टार्टअप्स को समर्थन देने में सक्रियता दिखाई है। इस बीच, भारतीय एआई बाजार के लिए एक सुखद खबर आई है। अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल के अनुसार, भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे प्रतिस्पर्धी देश बनकर उभरा है।

Artificial Intelligence सेक्टर में भारत ने बनाई अलग और खास पहचान

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और चीन के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रतिस्पर्धा में भारत तीसरे स्थान पर है। इसके साथ ही, कम और मध्यम आय वाले देशों में भारत सबसे ऊंचे स्तर पर है। यह एआई क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर एआई प्रतिस्पर्धा में अमेरिका को 78.6 का वाइब्रेंसी स्कोर प्राप्त हुआ है, जिससे वह पहले स्थान पर है। इसके बाद, चीन 36.95 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत 21.59 के स्कोर के साथ तीसरे नंबर पर है। यह भारत को कई उन्नत इकोसिस्टम वाले देशों जैसे दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, जापान, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस से आगे रखता है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की लिस्ट में इन मापदंडों का रखा गया ध्यान

अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपनी रैंकिंग में कई मानदंडों का ध्यान रखा है, जिनमें रिसर्च और डेवलपमेंट, टैलेंट की उपलब्धता, निवेश और आर्थिक प्रभाव, बुनियादी ढांचा, जनमत, और नीति तथा सरकारी शासन शामिल हैं। साथ ही, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एआई सेक्टर में प्रगति करने वाले देशों में आय भी एक महत्वपूर्ण कारक है।

इसके अलावा, यह भी बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जिसका कारण यह है कि भारत के पास एआई सेक्टर में बहुत सी प्रतिभाएं मौजूद हैं। टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग में, भारत के पास बड़ी और कुशल कार्यबल की संख्या है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार एआई क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए कई प्रयास कर रही है। ऐसे में आने वाले 5 वर्षों में भारतीय एआई क्षेत्र में और अधिक निवेश की उम्मीद है, जिससे एआई क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है।

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